Friday, May 22, 2020

आज स्वदेशी भूल गए

प्रांत, राज्य के चक्कर में, आज स्वदेशी भूल गए,
एक देश के वासी हैं पर, आज स्वदेशी भूल गए।
आजादी में साथ दिया है, आज स्वदेशी भूल गए,
अलग अलग हैं ऐसा सोचा, और स्वदेशी भूल गए।

प्रांत अलग तो कहा प्रवासी, और स्वदेशी भूल गए,
रोजगार की हो तलाश तो, आज स्वदेशी भूल गए।
देश एक पर अलग बाशिंदे, आज स्वदेशी भूल गए,
घर वापिस जाना है कहते, और स्वदेशी भूल गए।

रोजगार है, मिली है रोटी, और स्वदेशी भूल गए,
धन अर्जन ना अपनापन, आज स्वदेशी भूल गए।
कठिनाई में घर को उन्मुख, और स्वदेशी भूल गए,
देश पराया लगता है तब, और स्वदेशी भूल गए।

वोट नोट का चक्कर सारा, और स्वदेशी भूल गए,
बांट दिया था हर समाज, और स्वदेशी भूल गए।
पुरखों की धरती अपनी है, और स्वदेशी भूल गए,
परदेशी बन फिरे देश में, और स्वदेशी भूल गए।

परदेशी है और प्रवासी है, आज स्वदेशी भूल गए,
कौन कर रहा नामकरण, और स्वदेशी भूल गए।
देश एक है या अनेक है, आज स्वदेशी भूल गए,
भारत सबका है स्वदेश, ये सभी स्वदेशी भूल गए।

डॉ हिमांशु शेखर

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