Saturday, May 9, 2020

जीवाणुस्तान

जीवाणुस्तान

मैं कथा सुनाता, बंद हिन्दुस्तान की।
अब कथा है ये एक जीवाणुस्तान की।

ये जीवाणु पाप सरीखा, जाने किस खानदान की,
देश में आया, फैल के छाया, लाए हर सुनसान की,
मैं कथा सुनाता, बंद हिन्दुस्तान की।

सूक्ष्मजीव में, भरी है ताकत, किसी बड़े बलवान की,
और सभी अब मांग दुआएं, अपने जीवन दान की,
मैं कथा सुनाता, बंद हिन्दुस्तान की।
अब कथा है ये एक जीवाणुस्तान की।

मृत इतने कि, जरूरत आई, यमदूतों के खान की,
ये अदृश्य बन, काल बना है, जीवित हर इंसान की,
मैं कथा सुनाता, बंद हिन्दुस्तान की।

अब मानव जो नहीं संक्रमित, ऐसे हर बलिदान की,
और पीड़ितों से बढती जो, ऐसे हर विष पान की,
मैं कथा सुनाता, बंद हिन्दुस्तान की।

लोग मर रहे, बड़ी तेजी से, लघुता में अनजान की,
इन सबको अब, इंतजार है, किसी नए वरदान की,
मैं कथा सुनाता, बंद हिन्दुस्तान की।
अब कथा है ये एक जीवाणुस्तान की।

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