Sunday, May 3, 2020

बंदे चले कमाने को

बंदे चले कमाने को

डॉ हिमांशु शेखर

मास्क लगा आफिस निकले, बंदे आज कमाने को,
आज समय ने डरा दिया, हर आशा, आशियाने को।
मौसम बड़ा सुहाना बाहर, घर रहते हैं बहाने को,
बाहर जाने से कतराती, नासमझी समझाने को।
थूक न फेंको, मास्क लगाओ, समझ आ गई ज़माने को,
रह रह कर के हाथ धो रहे, जोंक भी जल अपनाने को।
मानव को मालूम था सारा, अब पालन करवाने को,
कोई नहीं कहता, खुद गाते, अनुशासन के गाने को।
सुना था गधे पे ना चढ़ते, कहो कभी जो ज़माने को,
पर खुद ही चढ़ घूम रहे, टक्कर देते परवाने को।
कहां सफाई रास न आई, थी पहले मनवाने को,
आज उन्हीं से राग सफाई, सुनी बात मनवाने को।
आज सामने लाना ऐसे, डर के किसी बहाने को,
जिससे कुत्ते की पूंछ यहां, सीधी मिलती दर्शाने को।
सरकार कहेगी तब समझेंगे, समय विकट है आने को,
खुद सब अपनी देखभाल कर, आगे चले कमाने को।
शेखर कहता समय नहीं है, बेमतलब ही गंवाने को,
आज प्रकृति रूष्ट हुई है, जतन करोगे मनाने को।
कोई नहीं आयेगा कहने, बीते हुए फंसाने को,
अगर हुए शामिल उनमें, जो गए न वापिस आने को।

No comments:

Post a Comment