Saturday, May 16, 2020

पानी बहुत था

आधी हो मटकी, छलकती है लेकिन,
ना छलके तो कहते हैं, पानी बहुत था,
मगर खाली मटकी भी, ना है छलकती,
फिर कैसे मटके में, पानी बहुत था।1।
भारी है मटकी तो, खाली या पूरी,
गलत सोचना है कि, पानी बहुत था,
बहुत नामी जगह से, जो की है पढ़ाई,
जरूरी नहीं है कि, ज्ञानी बहुत था।2।

बहुत बोलता है, वो अज्ञानता में,
और दुनिया ये समझे कि, ज्ञानी बहुत था,
अधजल हो गगरी, या अज्ञानता हो,
दोनों में लगता है, पानी बहुत था।3।
ज्ञानी हो, पानी हो, या ना हो ये सब,
मगर दिल से निकले कि, दानी बहुत था,
अगर साथ वालों को, लेकर चले संग,
तो ज्ञानी ना हो फिर भी, दानी बहुत था।4।

शेखर ये कहता कि, आध्यात्मिक बन,
दुनिया कहेगी, रूहानी बहुत था,
कभी भी ना ठहरो, निरंतर ही बढ़ना,
हो फ़ुरसत तो चर्चा, रवानी बहुत था।5।
कभी भी ना तुम करना, ऐसी हिमाकत,
कि कहने लगे सब, फुटानी बहुत था,
सबों को प्रकाशित, करो रोज इतना कि,
जाहिर हो सबमें, नूरानी बहुत था।6।

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