Monday, June 15, 2020

बैठक में भैंस

बैठक में भैंस


बैठक ऐसी हो रही, मनोरंजन सब पाय,
दृश्य और आवाज में, तालमेल ना पाय।
काली सारी पट्टिका, श्वेत बताई जाय,
ना लिखा पर सब उसे, भरी हुई बतलाय। 
आम को इमली कहा है, सर भी रहे हिलाय,
और गदहे से दूध लिया, कहते उसको गाय।
गोल कहा अंग्रेजी में, हिन्दी का बतलाय,
कहते गोला की जगह, अंडा ले लो भाय।
बैठक में सब चुप रहे, एक रहा बतलाय,
जैसे सारा ज्ञान अब, उसमें सिमटा जाय।
अधजल गगरी ज्ञान की, यहां रहा चिल्लाय,
श्रोता की जगह दिखे, जीव जन्तु समुदाय।
बीन बजाकर देखिए, सांप कहां से लाय,
भैंस बीन लेकर वही, कथा पुनः दुहराय।
वही पुरानी देखिए, कथा रहा बतलाय,
काला अक्षर देख के, भैंस रहे पगुराय।

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