Saturday, May 16, 2020

अंधेरा बहुत था

चिरागों को रौशन, किया तो बहुत था,
दीपक की लौ को, बढ़ाया बहुत था।
मगर बंद कमरे के, बंद आंख वाले,
गलत कहते बाहर, अंधेरा बहुत था।1।
वो दिन में अंधेरे, को खोजा करेंगे,
सूरज है फिर भी, अंधेरा बहुत था।
दिल में ले कालिख, बड़े बन गए हैं,
ऊंचाई में शायद, अंधेरा बहुत था।2।
झूठी हो बातें, बहुत फैलती हैं,
सच्चाई में अब, अंधेरा बहुत था।
उजले से कपड़े पे, एक दाग आया,
उसी दाग़ से अब, अंधेरा बहुत था।3।
हासिल थे सौ से भी, ज्यादा महारथ,
कि नौसिखियों में, अंधेरा बहुत था।
खुश भी न रह पाए, इस सोच में वो,
कि दुख आ न जाए, अंधेरा बहुत था।4।
सफर का अभी तो, ये आगाज होगा,
पथिक ना बने पर, अंधेरा बहुत था।
हर काम मिलता तो, कहते हैं बोझा,
उनका ही कलमा, अंधेरा बहुत था।5।
जिन्हें मिल गई थी, अफरात दौलत,
उन्हें कहते देखा , अंधेरा बहुत था।
गरीबों ने बांटे थे, मिलकर उजाला,
अमीरों की गलियां, अंधेरा बहुत था।6।
उजाले को बांटोगे, तो ही बढ़ेगा,
अंधेरे को बांटे, अंधेरा बहुत था।
शेखर ये कहता कि, पथ खोज लूंगा
मगर ना कहूंगा, अंधेरा बहुत था।7। 

2 comments:

  1. Nice,spread positivity all the time. Law of attraction. Vinay Pandey

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  2. वाह! भाई हम तो आपकी तारीफों के मुरीद हो गए। आप तो मेरा बहुत ध्यान रख रहें हैं। धन्यवाद।

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