आकाश को अंजाम दे रखा है
आकाश को हमने थाम रखा है, धरती की छत का नाम दे रखा है,
मालूम नहीं आकाश कब चल दे, जिसको अपना दिल ओ जान दे रखा है।1।
आकाश को रास्ते का नाम दे रखा है, सुबह से शाम तक का इंतजाम दे रखा है,
पूरब से पश्चिम तक सफर का, सूरज और चांद को पैगाम दे रखा है।2।
आकाश को जीवन की कमान दे रखा है, हर बदलते मौसम की दुकान दे रखा है,
खुशी से रौशन जो होती जाए, हर उस गम की दास्तान दे रखा है।3।
आकाश को मंजिल का नाम दे रखा है, सफर का सारा इंतजाम दे रखा है,
पहुंच सकेंगे मंजिल पे यकीनन, जीने और दरख्तों को अंजाम दे रखा है।4।
आकाश को जमींदोज कर कफ़न दे रखा है, शोहरत को सरेआम दफन दे रखा है,
गैरों के कारण कुछ नहीं होता, मैंने अपनों के दामन में मुसलसल फन दे रखा है।5।
आकाश को सुर्खरू ख्वाब दे रखा है, काले, नीले रंगों का खिताब दे रखा है,
कालिमा या नीलिमा की टक्कर में, रौशन करने को माहताब दे रखा है।6।
आकाश को जमीन पर मकान दे रखा है, क्षितिज को थोड़ा आराम दे रखा है,
मिलन को हो किसी क्षितिज का आसरा, ऐसी सोच को मैंने कयाम दे रखा है।7।
आकाश को सुराख का पैगाम दे रखा है, चांदी के जूतों का सलाम दे रखा है,
दोजख में जाएंगे कोई और शेखर, जन्नत को मंजिल का मुकाम दे रखा है।8।
आकाश को हमने थाम रखा है, धरती की छत का नाम दे रखा है,
मालूम नहीं आकाश कब चल दे, जिसको अपना दिल ओ जान दे रखा है।1।
आकाश को रास्ते का नाम दे रखा है, सुबह से शाम तक का इंतजाम दे रखा है,
पूरब से पश्चिम तक सफर का, सूरज और चांद को पैगाम दे रखा है।2।
आकाश को जीवन की कमान दे रखा है, हर बदलते मौसम की दुकान दे रखा है,
खुशी से रौशन जो होती जाए, हर उस गम की दास्तान दे रखा है।3।
आकाश को मंजिल का नाम दे रखा है, सफर का सारा इंतजाम दे रखा है,
पहुंच सकेंगे मंजिल पे यकीनन, जीने और दरख्तों को अंजाम दे रखा है।4।
आकाश को जमींदोज कर कफ़न दे रखा है, शोहरत को सरेआम दफन दे रखा है,
गैरों के कारण कुछ नहीं होता, मैंने अपनों के दामन में मुसलसल फन दे रखा है।5।
आकाश को सुर्खरू ख्वाब दे रखा है, काले, नीले रंगों का खिताब दे रखा है,
कालिमा या नीलिमा की टक्कर में, रौशन करने को माहताब दे रखा है।6।
आकाश को जमीन पर मकान दे रखा है, क्षितिज को थोड़ा आराम दे रखा है,
मिलन को हो किसी क्षितिज का आसरा, ऐसी सोच को मैंने कयाम दे रखा है।7।
आकाश को सुराख का पैगाम दे रखा है, चांदी के जूतों का सलाम दे रखा है,
दोजख में जाएंगे कोई और शेखर, जन्नत को मंजिल का मुकाम दे रखा है।8।
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