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हिमांशु शेखर की हिन्दी कविताएं
स्वांतः सुखाय वर्तमान परिस्थितियों का सजीव चित्रण करने की कोशिश में प्रगाढ़ सोच मन चीर कर कविता के रूप में प्रस्फुटित होती है। इस खण्ड में उन्हीं स्वरचित कविताओं का संकलन है, जिनमें से कुछ किसी पुस्तक का हिस्सा भी रह चुकी है।
Monday, August 30, 2021
Sunday, June 28, 2020
कोरोना माई
कोरोना माई
भारत कोविड को, कोरोना माई बताता है,
पैंडामिक को इकनॉमिक का भाई बताता है।
अजीब देश में आकर, फंस गया है, शेखर,
यहां बीमारी का पहाड़ है, वो राई बताता है।
हाथ से ज्यादा मुंह, का जोर चलता, शेखर,
गाली देनी है तो, इसको हरजाई बताता है।
छोड़ा मास्क, दूर रहना, भी गवारा नहीं उनको,
इन आदतों को वो सड़ी हुई, काई बताता है।
सब ऐहतियात बरतने का, बेकार ढोंग करतें हैं,
असल आंकड़ा तो, बेवजह तन्हाई बताता है।
रोज संक्रमण का ग्राफ, ऊपर ही बढ़ेगा शेखर,
फ़िक्र करें ना करें, आंकड़ों की लड़ाई बताता है।
सब जुटे हैं इस तरह से, प्रचार करने शेखर,
कोरोना को चुनाव में खड़ा, भाई बताता है।
कोरोना राग तो, पूरी दुनिया में फैला शेखर,
इसे वो बिना शादी की, शहनाई बताता है।
आर्थिक मदद का ऐलान, कोरोना में शेखर,
कुछ मिले तो खुजली को, खुदाई बताता है।
धन दौलत को छिपाने की, आदत है शेखर,
बीमारी छिपाकर, घर की कमाई बताता है।
जब तक देश, बरबाद ना हो जाएगा शेखर,
वो कोरोना को, घर का, जमाई बताता है।
योजना हकीकत में नहीं, किले बनाते, शेखर,
जमीनी नहीं, वो तो किले को हवाई बताता है।
कभी भूल से गिनती, घट गई हो, शेखर,
गाजे बाजे के साथ इसकी विदाई बताता है।
जड़ से उखाड़ेंगे, कोविड को मिलकर शेखर,
इलाज़ का नुस्खा तो, बस सफाई बताता है।
डॉ हिमांशु शेखर
Monday, June 22, 2020
चोर की सत्ता
चोर की सत्ता
डॉ हिमांशु शेखर
अगर कोई चोर दिल से हो, उसे चोरी ही करनी है,
उसे धन दे दो बिन मांगे, तो भी चोरी ही करनी है।
बिना पूछे, छिपाकर, छीनकर, झोली ही भरनी है,
अगर राजा बना दो तो, खजाने की ही मरनी है।
खुले में काम करने में तो, नानी उसकी मरनी है,
अगर दो ताले ना तोड़ें, तो ये लानत की करनी है।
ना दो ईनाम या इज्जत, ये सब बेकार करनी है,
उसे दो हथकड़ी और जेल ही उसकी वैतरणी है।
नहीं मालूम थी फितरत, मगर मालूम करनी है,
वो तख्तासीन है पर दिल से क्या, मालूम करनी है।
उसे था ताज हासिल, जो उसी के सर पे धरनी है,
मगर उस ताज से मोती, उसे गायब जो करनी है।
चोरी सिद्ध है उसकी, मगर अभिषेक करनी है,
वो चोरी ही करेगा ऐसी, हद कायम जो करनी है।
यही दस्तूर है बेहतर कि, चोरी ही तो करनी है,
यहां हर शाख पे बैठे, की पूजा ही तो करनी है।
जो तख्तासीन होगा वैसी, चारों ओर करनी है,
सज्जन, साधुओं को चोर की, इज्जत भी करनी है।
ना कोई पाप , कोई पुण्य है, केवल ये करनी है,
कि चोरी जब हो सत्तासीन, चोरी ही तो करनी है।
हासिल तख्त सुअर को, तो कीचड़ में ही पड़नी है,
अगर गदहा हो राजा तो, दुलत्ती ही तो पड़नी है।
अगर लोमड़ हो सत्ता में, तो मक्कारी ही झड़नी है,
तो चोरी में नई कोई अलग, कथनी ना करनी है।
बड़ी कोशिश छिपाने की, बयां हालात करनी है,
ना ढल मैं पाऊंगा आखिर, मुझे गलती ना करनी है।
मैं दिल से काम करता हूं, यही बस बात करनी है,
मैं इस युग का नहीं, जाहिर मुझे ये बात करनी है।
डॉ हिमांशु शेखर
Sunday, June 21, 2020
चीनी छोड़ो नारा है
चीनी छोड़ो नारा है
डॉ हिमांशु शेखर
सीमा पे आवाज लगाकर, भारत को ललकारा है,
सबक सिखाने चीनी को, सेना ने जमकर मारा है।
देश मांगता जनता से, चीनी का करो खसारा है,
बहिष्कार कर चीनी का, सेना को देना सहारा है।
चीनी पर गुस्सा है सबका, व्हाट्सएप पे नगाड़ा है,
पर खरीदना सस्ता जो भी, मिले ये सच की धारा है।
सरकारी प्रतिबंध लगे पर, जन आक्रोश तो हारा है,
वन प्लस, ओप्पो, भीभो, का बिकता मोबाइल सारा है।
चीनी कम से चीनी मुक्ति, तक जाने का नारा है,
चीनी के प्रतिरोध का डंका, पीटे देश हमारा है।
नहीं खरीदेंगे चीनी सब, कहते यही नजारा है,
बहुत बड़ी सी बातें दिखती, पर बातें आवारा हैं।
दिशाहीन ये भीड़ तंत्र है, बहती ज्ञान की धारा है,
पर चीनी से मुक्ति का, ना लगता जोश करारा है।
समाचार में दिखलाने को, चीनी रोको नारा है,
पर चीनी मोबाइल के बिन, चले न काम हमारा है।
रोक दिया चीनी आपूर्ति, पर विकल्प का मारा है,
झक मार कर चीनी से, जनता का चले गुजारा है।
दृढ़ निश्चय की कमी झलकती, बातें बड़ी सहारा है,
निर्णय में संदेह झलकता, कहना यही गवारा है।
पर खरीद कर जला के, चीनी में नुकसान हमारा है,
नया नहीं चीनी लेंगे बस, इतना शेखर का नारा है।
क्षमा करेंगे पर मुझको तो, दिखता यही नजारा है,
सस्ता है तो चीनी लेंगे, सोच बदलिए नारा है।
सोच नहीं पर अमल किजिए, शक बेकार हमारा है,
ज्ञान नहीं करबद्ध प्रार्थना, चीनी छोड़ो नारा है।
शेखर की है पुनः गुजारिश, ना ये केवल नारा है,
देशप्रेम है, स्वावलंबन की इससे निकले धारा है।
देश की खातिर, चीन को मुद्रा, ना देना ही गवारा है,
उस पैसे के बल पर आखिर, उसने तो ललकारा है।
चीनी सामानों पर असली, हो रोक तो यही नजारा है,
उसको भारत से एक भी पैसा, ना मिलना ही नारा है।
डॉ हिमांशु शेखर
Wednesday, June 17, 2020
चीन आ गया
चीन आ गया
डॉ हिमांशु शेखर
उठो जवानों चीन आ गया,
तोप टैंक संगीन आ गया,
मारो इसको चीन आ गया,
सरहद पर अब चीन आ गया।
भारत में रहने चीन आ गया,
चीनी था नमकीन आ गया,
जिरह जरा संगीन आ गया,
सरहद पर अब चीन आ गया।
सांप बिना कोई बीन आ गया,
लड़ने को वो तल्लीन आ गया,
समय बड़ा गमगीन आ गया,
सरहद पर अब चीन आ गया।
चेहरे को कर मलीन आ गया,
डंडा लेकर बलहीन आ गया,
मक्कारी की मशीन आ गया,
सरहद पर अब चीन आ गया।
ये काम जरा महीन आ गया,
इज्जत की तौहीन आ गया,
कब्जा करने जमीन आ गया,
सरहद पर अब चीन आ गया।
सुख सबका ये छीन आ गया
धरा को करने दीन आ गया,
बदमाशी का फरदीन आ गया,
सरहद पर अब चीन आ गया।
जख्म जरा प्राचीन आ गया,
हार जीत का सीन आ गया,
मारो मारो चीन आ गया,
सरहद पर अब चीन आ गया।
अवसर अब नवीन आ गया,
धरा को कर रंगीन आ गया,
सैनिक ना ये अमीन आ गया,
सरहद पर अब चीन आ गया।
युद्ध शुरू यकीन आ गया,
बहिष्कार हो चीन आ गया,
जल्द भगाओ चीन आ गया,
सरहद पर अब चीन आ गया।
शेखर कहता चाउमीन आ गया,
एप भी अब नवीन आ गया,
बंद हो चीनी, चीन आ गया,
सरहद पर अब चीन आ गया।
Tuesday, June 16, 2020
मानव व्यथा का समाधान
मानव व्यथा का समाधान
बहुत सारे कारणों से, व्यथित मानव आज है,
अभी तन और मन पे देखो, रोज गिरती गाज है।
एक जीवाणु से पीड़ित, विश्व का समाज है,
इस कोरोना से लड़े, बिन लड़े, ही नाराज है।
ढांढस बंधा कर चलने का, होता अभी आगाज है,
तभी इस भूकम्प से, विचलित हुआ अंदाज है।
देश के हर भाग में, ये प्रकोप, बा आवाज है,
त्रस्त को हर बार कंपन, देना इसका काज है।
तन मन के कण सभी, अब इस कदर मुहताज हैं,
भूकम्प हो या हो कोरोना, सबसे डरते आज हैं।
ये नहीं कम था कि टिड्डी, दल का हमला आज है,
फसल को चट कर कहें कि, सब पे उनका राज है।
टिड्डी के ही साथ तूफानों, का स्वागत आज है,
सारी संपत्ति की बर्बादी, का मंजर आज है।
वो गया अम्फन तो फिर, निसर्ग का आगाज है,
जल प्रलय से सृष्टि की, रक्षा में दुविधा आज है।
मानसिक अवसाद से, तबीयत हुई नासाज है,
आज इसकी चर्चा कर, दुख में हैं, रिवाज़ है।
तन से हों बीमार तो अब, ज्ञात कुछ इलाज़ है,
मन से हों तो क्या करें, ये रोग लाइलाज है।
शेखर की सारी आपदा पर, व्यक्त ये अल्फ़ाज़ है,
कोरोना से मानसिक, अवसाद का इलाज है।
सामने से आ रहा जो, सब पे करना नाज है,
झेलकर आगे बढ़े, उसके ही सर पर ताज है।
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