स्वांतः सुखाय वर्तमान परिस्थितियों का सजीव चित्रण करने की कोशिश में प्रगाढ़ सोच मन चीर कर कविता के रूप में प्रस्फुटित होती है। इस खण्ड में उन्हीं स्वरचित कविताओं का संकलन है, जिनमें से कुछ किसी पुस्तक का हिस्सा भी रह चुकी है।
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