Wednesday, June 17, 2020

चीन आ गया

चीन आ गया

डॉ हिमांशु शेखर

उठो जवानों चीन आ गया,
तोप टैंक संगीन आ गया,
मारो इसको चीन आ गया,
सरहद पर अब चीन आ गया।

भारत में रहने चीन आ गया,
चीनी था नमकीन आ गया,
जिरह जरा संगीन आ गया,
सरहद पर अब चीन आ गया।

सांप बिना कोई बीन आ गया,
लड़ने को वो तल्लीन आ गया,
समय बड़ा गमगीन आ गया,
सरहद पर अब चीन आ गया।

चेहरे को कर मलीन आ गया,
डंडा लेकर बलहीन आ गया,
मक्कारी की मशीन आ गया,
सरहद पर अब चीन आ गया।

ये काम जरा महीन आ गया,
इज्जत की तौहीन आ गया,
कब्जा करने जमीन आ गया,
सरहद पर अब चीन आ गया।

सुख सबका ये छीन आ गया 
धरा को करने दीन आ गया,
बदमाशी का फरदीन आ गया,
सरहद पर अब चीन आ गया।

जख्म जरा प्राचीन आ गया,
हार जीत का सीन आ गया,
मारो मारो चीन आ गया,
सरहद पर अब चीन आ गया।

अवसर अब नवीन आ गया,
धरा को कर रंगीन आ गया,
सैनिक ना ये अमीन आ गया,
सरहद पर अब चीन आ गया।

युद्ध शुरू यकीन आ गया,
बहिष्कार हो चीन आ गया,
जल्द भगाओ चीन आ गया,
सरहद पर अब चीन आ गया।

शेखर कहता चाउमीन आ गया,
एप भी अब नवीन आ गया,
बंद हो चीनी, चीन आ गया,
सरहद पर अब चीन आ गया।

2 comments:

  1. धन्यवाद। ब्लाग में दूसरी कविता भी देखिए। शायद कोई पसंद आ जाए। होम के पास आगे पीछे जाने का key है।

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