चीन आ गया
डॉ हिमांशु शेखर
उठो जवानों चीन आ गया,
तोप टैंक संगीन आ गया,
मारो इसको चीन आ गया,
सरहद पर अब चीन आ गया।
भारत में रहने चीन आ गया,
चीनी था नमकीन आ गया,
जिरह जरा संगीन आ गया,
सरहद पर अब चीन आ गया।
सांप बिना कोई बीन आ गया,
लड़ने को वो तल्लीन आ गया,
समय बड़ा गमगीन आ गया,
सरहद पर अब चीन आ गया।
चेहरे को कर मलीन आ गया,
डंडा लेकर बलहीन आ गया,
मक्कारी की मशीन आ गया,
सरहद पर अब चीन आ गया।
ये काम जरा महीन आ गया,
इज्जत की तौहीन आ गया,
कब्जा करने जमीन आ गया,
सरहद पर अब चीन आ गया।
सुख सबका ये छीन आ गया
धरा को करने दीन आ गया,
बदमाशी का फरदीन आ गया,
सरहद पर अब चीन आ गया।
जख्म जरा प्राचीन आ गया,
हार जीत का सीन आ गया,
मारो मारो चीन आ गया,
सरहद पर अब चीन आ गया।
अवसर अब नवीन आ गया,
धरा को कर रंगीन आ गया,
सैनिक ना ये अमीन आ गया,
सरहद पर अब चीन आ गया।
युद्ध शुरू यकीन आ गया,
बहिष्कार हो चीन आ गया,
जल्द भगाओ चीन आ गया,
सरहद पर अब चीन आ गया।
शेखर कहता चाउमीन आ गया,
एप भी अब नवीन आ गया,
बंद हो चीनी, चीन आ गया,
सरहद पर अब चीन आ गया।
Wonderful poem sir.
ReplyDeleteधन्यवाद। ब्लाग में दूसरी कविता भी देखिए। शायद कोई पसंद आ जाए। होम के पास आगे पीछे जाने का key है।
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