बारिश का मजा
डॉ हिमांशु शेखर
फूलों की खुशबू से महकेगी दुनिया, जो बारिश से गुलशन में आ जाएगा।
पतझड़ से गर्मी तक आई तो दुनिया, में बारिश की बूंदें ही छा जाएगा।1।
हर जेठ की दोपहर में थे आशिक, वो सावन के झूलों पे आ जाएगा।
चलो एक बच्चे की नजरों से देखें, तो बारिश का मौसम सदा आएगा।2।
वो पानी के सोते में, कागज की किस्ती, कभी ले के जाओ, मजा आएगा,
नहीं कुछ मिले तो, खुद ही चले जाओ, भींगोंगे बचपन चला आएगा।3।
बारिश में छाते से लड़ना झगड़ना, और पानी में छप छप बता पाएगा,
हम भी थे बच्चे, अब भी हैं शायद, यही सोच जीवन बचा पाएगा।4।
बारिश में जाते थे सब पाठशाला, कि शायद हमें वो पढ़ा पाएगा।
मगर आज बारिश में दफ़्तर गया तो, आफत को कैसे घटा पाएगा।5।
बारिश में गीले थे कपड़े, थी सर्दी, ठिठुरन में भी तो मजा आएगा।
अब ये दशा है कि सर्दी हुई तो, हमें बंद कमरे में रखा जाएगा।6।
अगर उम्र अपनी जो जाहिर किए तो, ठंडी ही आहें भरा जाएगा।
हासिल तजुर्बा जो वर्षों किया था, बारिश में बहता चला जाएगा।7।
बारिश वही है, मगर हम ना बच्चे, तवज्जो न हमको, दिया जाएगा।
शेखर ये माने की बारिश वही है, अगर बच्चे हैं हम मजा आएगा।8।
ना सावन के झूले, ना किस्ती, ना भींगे, तो बोलो कि कैसे नशा छाएगा।
बारिश भी मेरी जो हम उम्र होती, तो अपना वो खोया पता पाएगा।9।
किसी बच्चे ने मतला मुझको दिया था, ये बारिश से मुझको बचा पाएगा।
मगर कौन चाहेगा बचना अगर, ऐसी बारिश हो, बचपन चला आएगा।10।
उस बच्चे का नाम आदित्य है, जिसने इस गीत का मतला मुझे दिया है।
डॉ हिमांशु शेखर
फूलों की खुशबू से महकेगी दुनिया, जो बारिश से गुलशन में आ जाएगा।
पतझड़ से गर्मी तक आई तो दुनिया, में बारिश की बूंदें ही छा जाएगा।1।
हर जेठ की दोपहर में थे आशिक, वो सावन के झूलों पे आ जाएगा।
चलो एक बच्चे की नजरों से देखें, तो बारिश का मौसम सदा आएगा।2।
वो पानी के सोते में, कागज की किस्ती, कभी ले के जाओ, मजा आएगा,
नहीं कुछ मिले तो, खुद ही चले जाओ, भींगोंगे बचपन चला आएगा।3।
बारिश में छाते से लड़ना झगड़ना, और पानी में छप छप बता पाएगा,
हम भी थे बच्चे, अब भी हैं शायद, यही सोच जीवन बचा पाएगा।4।
बारिश में जाते थे सब पाठशाला, कि शायद हमें वो पढ़ा पाएगा।
मगर आज बारिश में दफ़्तर गया तो, आफत को कैसे घटा पाएगा।5।
बारिश में गीले थे कपड़े, थी सर्दी, ठिठुरन में भी तो मजा आएगा।
अब ये दशा है कि सर्दी हुई तो, हमें बंद कमरे में रखा जाएगा।6।
अगर उम्र अपनी जो जाहिर किए तो, ठंडी ही आहें भरा जाएगा।
हासिल तजुर्बा जो वर्षों किया था, बारिश में बहता चला जाएगा।7।
बारिश वही है, मगर हम ना बच्चे, तवज्जो न हमको, दिया जाएगा।
शेखर ये माने की बारिश वही है, अगर बच्चे हैं हम मजा आएगा।8।
ना सावन के झूले, ना किस्ती, ना भींगे, तो बोलो कि कैसे नशा छाएगा।
बारिश भी मेरी जो हम उम्र होती, तो अपना वो खोया पता पाएगा।9।
किसी बच्चे ने मतला मुझको दिया था, ये बारिश से मुझको बचा पाएगा।
मगर कौन चाहेगा बचना अगर, ऐसी बारिश हो, बचपन चला आएगा।10।
उस बच्चे का नाम आदित्य है, जिसने इस गीत का मतला मुझे दिया है।
तुम्हारी कविता पढ़ कर बचपन याद आ गया
ReplyDeleteधन्यवाद सर! आप लोग की तारीफ से ही तो लिखने का हौसला आता है।
DeleteRemembering childhood, awesome
ReplyDeleteधन्यवाद। अच्छा लगे तो बताइए। मुझे भी प्रोत्साहन मिलता है।
Deleteहक़ीक़त एवं सच आज के परिप्रेक्ष्य में
ReplyDeleteधन्यवाद! दयानंद जी! छुट्टी का सदुपयोग कर रहा हूं।
DeleteExcellent Dr Himanshu,
ReplyDeleteI recall my school days when I used to read poems of Maithili Sharan Gupt, Ramdhari Singh 'Dinkar', Makhanlal Chaturvedi & so on, your composition seem to be at those levels if not better.
Look forward to read many more from a Technocrat who seem to be an all-rounder from his early days of career.
My best wishes.
Thank you sir. I am motivated with your comments. Regards. You can check my other poems also, on himanshushekharhindi.blogspot.com
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