कोरोना माई
भारत कोविड को, कोरोना माई बताता है,
पैंडामिक को इकनॉमिक का भाई बताता है।
अजीब देश में आकर, फंस गया है, शेखर,
यहां बीमारी का पहाड़ है, वो राई बताता है।
हाथ से ज्यादा मुंह, का जोर चलता, शेखर,
गाली देनी है तो, इसको हरजाई बताता है।
छोड़ा मास्क, दूर रहना, भी गवारा नहीं उनको,
इन आदतों को वो सड़ी हुई, काई बताता है।
सब ऐहतियात बरतने का, बेकार ढोंग करतें हैं,
असल आंकड़ा तो, बेवजह तन्हाई बताता है।
रोज संक्रमण का ग्राफ, ऊपर ही बढ़ेगा शेखर,
फ़िक्र करें ना करें, आंकड़ों की लड़ाई बताता है।
सब जुटे हैं इस तरह से, प्रचार करने शेखर,
कोरोना को चुनाव में खड़ा, भाई बताता है।
कोरोना राग तो, पूरी दुनिया में फैला शेखर,
इसे वो बिना शादी की, शहनाई बताता है।
आर्थिक मदद का ऐलान, कोरोना में शेखर,
कुछ मिले तो खुजली को, खुदाई बताता है।
धन दौलत को छिपाने की, आदत है शेखर,
बीमारी छिपाकर, घर की कमाई बताता है।
जब तक देश, बरबाद ना हो जाएगा शेखर,
वो कोरोना को, घर का, जमाई बताता है।
योजना हकीकत में नहीं, किले बनाते, शेखर,
जमीनी नहीं, वो तो किले को हवाई बताता है।
कभी भूल से गिनती, घट गई हो, शेखर,
गाजे बाजे के साथ इसकी विदाई बताता है।
जड़ से उखाड़ेंगे, कोविड को मिलकर शेखर,
इलाज़ का नुस्खा तो, बस सफाई बताता है।
डॉ हिमांशु शेखर
अद्भुत है आपकी कविता सर बहुत बहुत बधाई
ReplyDeleteGreat
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