चीनी छोड़ो नारा है
डॉ हिमांशु शेखर
सीमा पे आवाज लगाकर, भारत को ललकारा है,
सबक सिखाने चीनी को, सेना ने जमकर मारा है।
देश मांगता जनता से, चीनी का करो खसारा है,
बहिष्कार कर चीनी का, सेना को देना सहारा है।
चीनी पर गुस्सा है सबका, व्हाट्सएप पे नगाड़ा है,
पर खरीदना सस्ता जो भी, मिले ये सच की धारा है।
सरकारी प्रतिबंध लगे पर, जन आक्रोश तो हारा है,
वन प्लस, ओप्पो, भीभो, का बिकता मोबाइल सारा है।
चीनी कम से चीनी मुक्ति, तक जाने का नारा है,
चीनी के प्रतिरोध का डंका, पीटे देश हमारा है।
नहीं खरीदेंगे चीनी सब, कहते यही नजारा है,
बहुत बड़ी सी बातें दिखती, पर बातें आवारा हैं।
दिशाहीन ये भीड़ तंत्र है, बहती ज्ञान की धारा है,
पर चीनी से मुक्ति का, ना लगता जोश करारा है।
समाचार में दिखलाने को, चीनी रोको नारा है,
पर चीनी मोबाइल के बिन, चले न काम हमारा है।
रोक दिया चीनी आपूर्ति, पर विकल्प का मारा है,
झक मार कर चीनी से, जनता का चले गुजारा है।
दृढ़ निश्चय की कमी झलकती, बातें बड़ी सहारा है,
निर्णय में संदेह झलकता, कहना यही गवारा है।
पर खरीद कर जला के, चीनी में नुकसान हमारा है,
नया नहीं चीनी लेंगे बस, इतना शेखर का नारा है।
क्षमा करेंगे पर मुझको तो, दिखता यही नजारा है,
सस्ता है तो चीनी लेंगे, सोच बदलिए नारा है।
सोच नहीं पर अमल किजिए, शक बेकार हमारा है,
ज्ञान नहीं करबद्ध प्रार्थना, चीनी छोड़ो नारा है।
शेखर की है पुनः गुजारिश, ना ये केवल नारा है,
देशप्रेम है, स्वावलंबन की इससे निकले धारा है।
देश की खातिर, चीन को मुद्रा, ना देना ही गवारा है,
उस पैसे के बल पर आखिर, उसने तो ललकारा है।
चीनी सामानों पर असली, हो रोक तो यही नजारा है,
उसको भारत से एक भी पैसा, ना मिलना ही नारा है।
डॉ हिमांशु शेखर
बहुत सुन्दर, हिमांशु
ReplyDeleteधन्यवाद सर! चीनी का कुछ तो करना चाहिए|
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