Sunday, June 14, 2020

कोरोना से मसखरी

कोरोना से मसखरी

कोरोना को कहा मैंने कि, फ़ुरसत हो तो कल आना,
वो आया मास्क में यारों, मुझे इंसान जब माना।
कि जिसके नाम से ही मास्क में, दिखता कोरोना है,
वो सपना है हकीकत में, तो सबको मास्क में आना।

कोरोना कल मिला मुझको, वो मुझसे दूर चलता था,
वो मुझसे डर रहा था, और अपने हाथ मलता था,
कि उसका संक्रमण उसपे ही अब, हावी हुआ इतना,
उसके दिल में मुझसे डर का ऐसा खौफ पलता था।

कोरोना कह रहा मुझको, कि वापस उसको जाना है,
कि खबरों में अब उसका जिक्र, पीछे से ही आना है,
कहां आगाज इससे था, वो अब अंजाम से वंचित,
कि खबरों ने जो मुंह फेरा, ये बेइज्जत फ़साना है।

कोरोना नाम लेकर लड़ रहे, नेता हिफाजत  से,
वो अपनी साख को चमका रहे, अपनी शराफत से,
कोरोना मौन होकर सोचता, अपनी महारत से,
कि मौका दे दिया नेता को, बेमतलब अदावत से।

कोरोना ने किया मेहनत, और वो बदनाम है यारों,
मगर बिन काम के ही, बात कर बदनाम है यारों,
कोरोना को किए मेहनत, पे अपने शर्म आती है,
अगर बिन काम केवल, बात से बदनाम हैं यारों।

कोरोना का बड़ा मुश्किल, सुनो सवाल आया है,
वो आसाराम बापू सा बड़ा, कद ले के आया है,
वो पुरूष बन, संसार पर, शासन को आया था,
उसे भारत ने इज्ज़त से, कोरोना माई बताया है। 

कोरोना के लिए मुश्किल, समय भारत ले आया है,
वो मांगे चार, जीवन दान, भारत दस ले आया है,
कोरोना को हुई अनपच, उसे ये समझ आया है,
वो भारत से पलायन का, सलीका ढूंढ लाया है।

कोरोना को पुरूष से, माई बनना अब न भाया है,
कि दारू, बियर की दुर्गन्ध, से वो कसमसाया है,
न खबरों में तवज्जो है, न मुद्दा बन ये पाया है,
कहो क्या सोचकर ये जीव, भारत में समाया है।

कोरोना ने किया घर बंद, सारा खुल गया है अब,
न सड़क अब रहीं सूनी, न दफ्तर बंद सारे अब,
बहुत अब सह लिया, तैयार मरने को हैं सारे अब, 
अगर बढ़ता है बढ़ने दो, न कुछ भी बंद होगा अब। 

कोरोना का किया विग्रह, कहें क्यों रोना इसपे अब,
करो ना कह रहे दूजे, कहें ना बंद कुछ भी अब,
करीना को करें हैं याद, वैसे भी तो सज्जन हैं,
हिन्दी में कोरोना को, मुकुट कहते फिरें है अब।

4 comments:

  1. बहुत ही बढ़िया कविता है संकट के इस घड़ी में कोरोना पर आपने जो कविता लिखा है, कोरोना का जीवन धन्य हो गया । अभी तक तो सिर्फ लोग इसे गाली देते आते थे, आपने तो करोना को बिल्कुल एक नया रूप दे दिया है।आप महान कवि हैं। करुणा ने एक साथ जीवन में दूरी और नज़दीकियां दोनों बना दी है।हम सभी एक दूसरे से दूर दूर रहते हैं मगर इसी बहाने सभी लोग अपने घर में अपनों के पास पास रखते हैं।
    बहुत बढ़िया कविता है धन्यवाद आपको।

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  2. धन्यवाद अनूप भाई! आपने हमेशा मेरी सराहना की है और मेरे अल्फाजों को एक मुकाम हासिल करवाया है। आपका स्नेह मेरी धरोहर है। शुक्रिया।

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  3. Replies
    1. धन्यवाद सर। आप लोग हौसला देते रहिए।

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